मैं हॅूं राजभाषा

मैं हूँ राजभाषा। यह एक शिक्षाप्रद नाटक है।

मैं हॅूं राजभाषा
मैं हॅूं राजभाषा एक शिक्षाप्रद नाटक
रचनाकार: डॉ. ए. वेंकटेश्वर राव, उप महाप्रबंधक (राजभाषा) भारतीय खाद्य निगम आंचलिक कार्यालय (उत्‍तर) नोएडा
Narration (उद्घोषक/सूत्रधार द्वारा):
"सत्कार योग्य दर्शको,
आज हम आपके समक्ष एक ऐसा मंचन प्रस्तुत करने जा रहे हैं,
जहाँ राजभाषा हिंदी केवल भाषा नहीं,
बल्कि एक जीवंत चरित्र बनकर हमारे सामने आएगी।
यह नाटक एक प्रयोग है —
जिसमें नियम और धाराएँ काग़ज़ से निकलकर
मनुष्य का रूप धरती हैं,
और हमें याद दिलाती हैं कि
राजभाषा का महत्व केवल कार्यालय तक सीमित नहीं,
बल्कि हमारे राष्ट्रीय जीवन का अभिन्न अंग है।
आप देखेंगे —
कभी नियम 5 हँसते-हँसते समझाता है,
कभी धारा 3(3) डंडा लेकर चेतावनी देता है,
कभी नियम 11 हमें हमारी आधिकारिक जिम्मेदारियों की याद दिलाता है।
इस मंचन का उद्देश्य है —
हिंदी प्रयोग की कठिनाइयों को दिलचस्‍पी एवं रोचकता के साथ दिखाना,
और यह संदेश देना कि —
‘राजभाषा केवल कानून की बाध्यता नहीं,
बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है।’
तो आइए,
इस यात्रा में हमारे साथ चलिए,
जहाँ हास्य भी है, व्यंग्य भी है, और संदेश भी।
प्रस्तुत है —
"मैं हूँ — राजभाषा!""

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पात्र परिचय:
महिला (आम नागरिक) जो कार्यालय खोज रही है
राहगीर मार्गदर्शन करने वाला व्यक्ति
प्रबंधक (क्रय अनुभाग) कार्यालय का प्रबंधक
रेखा कार्यालय सहायक
स.म.प्र वरिष्ठ मानव संसाधन प्रबंधक
कार्तिक मानव संसाधन सहायक
प्रबंधक (लेखा) लेखा अनुभाग प्रमुख
महेश गृह व्यवस्था अनुभाग कर्मी
प्रबंधक (सामान्‍य)
नियम 5 हिंदी पत्राचार से संबंधित नियम का पात्र
धारा 3(3) राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) का पात्र
नियम 11 फॉर्म, रबड़ की मोहर, सूचना पट आदि से संबंधित नियम
कार्यालय प्रमुख/ अध्‍यक्ष
हिंदी अधिकारी
पति और पत्‍नी
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प्रॉपर्टीज़ (Properties):
• एक कार्यालय का सेटअप: डेस्क, कुर्सियाँ, फाइलें, टेलीफोन, कंप्यूटर इत्यादि।
• सूचना पट्ट: हिंदी, अंग्रेज़ी व द्विभाषी बोर्ड।
• डंडा (धारा 3(3) के लिए प्रतीकात्मक छड़ी)।
• फार्म, रबड़ की मोहरें, स्टैम्प पैड।
• प्रोजेक्टर (तकनीकी साधनों के लिए)।
• मंच पर बैकग्राउंड गीत: "हम होंगे कामयाब..." तथा "सरफरोशी की तमन्ना..."
• हिंदी भाषा के तकनीकी उपकरणों के पोस्टर: Google Translate, Voice Typing, लिला राजभाषा ऐप, हिंदी सहायक आदि।
• राजभाषा दिवस का बैनर।
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दृश्य 1 — कार्यालय के बाहर व स्वागतकक्ष
(मंच पर एक महिला थकी-हारी, परेशान अवस्था में इधर-उधर देखती हुई आती है। हाथ में एक फ़ाइल/बैग है।)
महिला (झुंझलाकर):
अरे! एक घंटा हो गया, ये कार्यालय मिलता ही नहीं।
(बार-बार गली, सड़क और बोर्ड की ओर देखती है।)
(तभी एक राहगीर आता है।)
राहगीर:
मैडम, यहीं सामने तो है — देखिए।
महिला (गुस्से और थकान से):
अरे! ऊपर बोर्ड सिर्फ अंग्रेजी भाषा में है।
अगर हिंदी में लिखा होता तो मैं कब की पहुँच जाती।
(दृश्य परिवर्तन — अब मंच पर स्वागतकक्ष दिखाया जाता है। डेस्क के पीछे एक अधिकारी बैठा है। महिला वहाँ पहुँचती है और पत्र दिखाती है।)
महिला (साँस फूलती हुई):
नमस्ते सर… ये देखिए नियुक्ति पत्र। मुझे आज इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है।
स्वागत अधिकारी (घड़ी देखकर):
लेकिन मैडम, इस पत्र में तो साफ़ लिखा है — सुबह 10 बजे।
और अभी घड़ी में 11 बज रहे हैं।
आप एक घंटा देरी से पहुँची हैं, इसलिए अब अनुमति नहीं दी जा सकती।
महिला (व्यथित स्वर में):
सर, मैं समय से ही निकली थी।
लेकिन रास्ते में कार्यालय ढूँढते-ढूँढते ही इतना समय लग गया।
अगर यहाँ का पता और बोर्ड हिंदी में होता,
तो मैं समय पर पहुँच जाती।
(अचानक प्रकाश बदलता है। मंच पर गंभीर संगीत बजता है और त्रिभाषा सूत्र प्रकट होता है। वह हाथ में एक प्रतीकात्मक स्क्रॉल/पुस्तक लेकर आता है।)
स्‍वागत अधिकारी: (आश्‍चर्य से) आप कौन हैं?
नमस्‍कार। मैं त्रिभाषा सूत्र हॅूं। (गंभीर किंतु सहानुभूतिपूर्ण स्वर में):
हाँ… (महिला को संबोधित करते हुए) आपकी बात बिल्कुल सच है।
हमारे संविधान में त्रिभाषा सूत्र का प्रावधान इसलिए किया गया था
कि कार्यालय और संस्थान हिंदी, अंग्रेज़ी और क्षेत्रीय भाषा — तीनों में जानकारी दें।
लेकिन जब हिंदी को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है,
तो आम नागरिक को परेशानी उठानी पड़ती है।
स्वागत अधिकारी (झेंपते हुए):
हाँ… ये सच है। हमें अपने बोर्ड में हिंदी का भी प्रयोग करना चाहिए।
त्रिभाषा सूत्र (दर्शकों की ओर देखकर):
याद रखिए —
“भाषा केवल संचार का साधन नहीं,
बल्कि जनता और प्रशासन के बीच सेतु है।”
अगर सेतु अधूरा होगा तो कोई भी समय पर गंतव्य तक नहीं पहुँच पाएगा।
(संगीत बजता है, प्रकाश धीमा होता है। दृश्य समाप्त।)
(दृश्य परिवर्तन।)

दृश्य 2 — क्रय अनुभाग
प्रबंधक:
रेखा, देखो यह पत्र हिंदी में आया है। जवाब बना दो — "Your letter received and the action is under process."
रेखा :
ठीक है सर।
(जैसे ही रेखा टाइप करने तैयार होती है, नियम 5 प्रकट होता है।)
प्रबंधक (चौंककर):
अरे। आप कौन हैं हमारे ऑफीस में घुस गयी/
नियम 5 (हंसते हुए):
मैं राजभाषा नियम 5 हूँ। हिंदी में आए पत्र का उत्तर हिंदी में देना अनिवार्य है।
प्रबंधक: परंतु हमें अंग्रेजी में उत्‍तर तैयार करना आसान होता है।
(नियम 5 हँसते हुए कहती है।) आप हिंदी में शुरू कीजिए तो आपको हिंदी भी आसान लगेगा

दृश्य 3 — कार्मिक अनुभाग
स.म.प्र:
कार्तिक, एक कार्यालय आदेश तैयार करो।
(कार्तिक आदेश बना कर लाता है।)
स.म.प्र:
आपने सिर्फ अंग्रेजी में बनाया। ठीक है, अभी समय नहीं है। मैं हस्‍ताक्षर करता हॅूं
(हस्ताक्षर के समय धारा 3(3) डंडा लेकर प्रकट होता है।)
स.म.प्र (चौंकते हुए):
डंडा लेकर कौन आया? आप हमारे आफीस में कैसे आ गया बिना अनुमति।
धारा 3(3):
मैं धारा 3(3) हॅूं। मुझे केंद्र सरकार के कार्यालय में जाने के लिए कोई अनुमति की जरूरत नहीं। आदेश द्विभाषी होना चाहिए।
स.म.प्र (घबराते हुए):
अभी मेरे पास उतना समय नहीं है। आप मेरे सहायक से बात कीजिए।
धारा 3(3):
नहीं मैं केवल हस्ताक्षरकर्ता से ही बात करता हूँ। यदि आप इसे द्विभाषी में जारी नहीं करेंगे तो आपके ऊपर कार्रवाई हो जायेगी।
स.म.प्र (डरते हुए):
मैं विवश हॅूं। वास्‍तव में मुझे हिंदी अनुवाद करना मालूम नहीं।
धारा 3(3):
घबराना नहीं। मैं अपने दोस्‍त कंठस्‍थ 2.0 को भेजूंगा। वह आपकी मदद करेगी।
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दृश्य 4 — गृह व्यवस्था अनुभाग
प्रबंधक (सामान्‍य):
महेश, रबड़ की मोहरों का क्या हुआ?
महेश:
सर, प्रूफ देख रहा हूँ। लेखा अनुभाग फाइल रोके बैठा है।
(दोनों लेखा अनुभाग जाते हैं।)
प्रबंधक (लेखा):
फाइल में राजभाषा नियमों का उल्लंघन हुआ है। नियम 11 के अनुसार रबड़ की मोहरें द्विभाषी में बनाना जरूरी है।
प्रबंधक (सामान्‍य)
लेकिन आप फाइल को रोक नहीं सकते।
प्रबंधक लेखा:
मुझे जांच बिंदु बनाया गया है। जांच बिंदु के अनुसार मुझे राजभाषा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। मुझे कार्यालय को वित्‍तीय नुकसान से भी बचाना है।
प्रबंधक (सामान्‍य)
सिर्फ अंग्रेजी में बनाने से वित्‍तीय नुकसान कैसे
प्रबंधक लेखा:
अभी आप सिर्फ अंग्रेजी में बनायेंगे। फिर भी बाद में हिंदी निरीक्षण के दौरान इसकी आपत्ति होगी तो दुबारा द्विभाषी बनवायेंगे। इससे वित्‍तीय नुकसान भी होगा। इसलिए पहले बार ही नियमों के अनुसार द्विभाषी में बनाने से वित्‍तीय नुकसान ही नहीं बल्कि राजभाषा नियमों का पालन भी होगा।
प्रबंधक (सामान्‍य)
धन्‍यवाद। बहुत महत्‍वपूर्ण जानकारी दी आपने। मैं जरूर भविष्‍य में पालन करूँगा।
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दृश्य 5 — तिमाही समीक्षा बैठक
कार्यालय प्रधान:
धारा 3(3) की क्‍या स्थिति है?
हिंदी अधिकारी:
शत-प्रतिशत का अनुपालन हुआ महोदय।
कार्यालय प्रधान:
नियम 5?
हिंदी अधिकारी:
90% महोदय। क्रय अनुभाग में कमी है।
कार्यालय प्रधान:
क्रय अनुभाग के प्रबंधक से स्‍पष्‍टीकरण मांगी जाये।
क्रय अनुभाग प्रबंधक:
महोदय, भविष्य में कभी उल्लंघन नहीं होगा।
कार्यालय प्रधान:
अच्छा। हिंदी पत्राचार?
हिंदी अधिकारी:
80%। लेकिन गत तिमाही की तुलना में प्रगति हुई है। कुल मिलाकर सभी क्षेत्रों में बहुत ही अच्‍छा विकास हुआ है महोदय।
कार्यालय प्रधान:
बहुत अच्‍छा। जिस अनुभाग में अच्‍छी प्रगति हुई है उनको पुरस्‍कार दिया जायेगा।
सभी अधिकारी:
खुशी के साथ तालियां बजाते हैं।
कार्यालय प्रधान (जोश में):
आप सब ने देश का नाम रोशन किया है।

अंतिम दृश्य — घर पर, हिंदी पखवाड़ा समापन के बाद
(मंच पर घर का सेटअप। एक टेबल, कुर्सी, पीछे दीवार पर कैलेंडर। पति थका-हारा सा बैग लेकर घर आता है। पत्नी इंतज़ार करती हुई खड़ी है।)
पत्नी (उत्सुकता से):
अरे सुनिए… इस बार हिंदी पखवाड़े में आपको क्या मिला?
पिछली बार तो हिंदी नोटिंग लिखने पर आपको नकद पुरस्कार मिला था…
और उसी से आपने मुझे वॉशिंग मशीन खरीदकर दी थी।
(पति कुर्सी पर बैठता है, बैग एक तरफ रख देता है।)
पति (थके स्वर में):
अरे भाग्यवान, इस बार तो कुछ नहीं मिला।
काम का इतना बोझ था कि हिंदी में नोटिंग ही नहीं लिख पाया।
तो पुरस्कार कैसे मिलता?
पत्नी (नाक सिकोड़ते हुए, थोड़े व्यंग्य में):
वाह जी! मतलब आपकी अंग्रेज़ी नोटिंग से सिर्फ़ दफ़्तर का काम चला,
लेकिन घर की “वॉशिंग मशीन” रुक गई।
पति (संकोच से):
अरे… समय ही नहीं मिला हिंदी में लिखने का।
पत्नी (हँसते हुए):
देखिए, समय सबके पास बराबर होता है…
बस लोग उसका उपयोग अलग-अलग करते हैं।
पति: एक भाषा में टाइप करने से मेरा हाथ दर्द कर रहा है। अभी दो भाषाओं में टाइप करना मेरे लिए मुश्किल है।
पत्‍नी : आप तकनीकी का उपयोग करने से आपको घंटों का काम मिनटों में हो जाता।
पती: वह कैसे।
पत्‍नी: बहुत सरल। आप वाईस टाइपिंग का इस्‍तेमाल कीजिए। देखिए आप Windows+H बटन दबाइये। हिंदी भाषा में कुंजी पटल बदलिये और बोलना शुरू कीजिए। (वहीं पर लैपटैप में दिखाती है)
पति: आश्‍चर्य से अरे यह तो बहुत आसान है। तुम मुझसे बहुत अच्‍छी जानती हो।
पति: (हँसते हुए हाथ जोड़कर):
जी… अबकी बार हिंदी नोटिंग डबल हो जायेगा।
तैयार रहिए, अगली बार फ्रिज भी घर आएगा!
(दोनों हँसते हैं, पर्दा गिरता है।)
समापन संदेश
भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, यह हमारी संस्कृति, अस्मिता और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है।
यह पूरा नाटक लगभग 35-45 मिनट का हो सकता है।

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