जरा सोचो तो कौन हॅूं मैं

धारा 3 3 पर लिखी गई विचारात्‍मक कविता

जरा सोचो तो.. कौन हूँ मैं
डॉ.ए.वेंकटेश्‍वर राव
उप महाप्रबंधक (राजभाषा)
जरा सोचो तो.. कौन हूँ मैं
राजभाषा की उन्‍नति के लिए मैंने लिया संकल्‍प
मुझे बहुत प्रिय है किसी को देना आदेश
बिना अधिसूचना के न होता मेरा काम कभी
हर तिमाही में भेजता हूँ प्रशासनिक रिपोर्ट
जरा सोचो तो.. कौन हूँ मैं
मेरा नाम रोशन होता है प्रेस विज्ञप्ति में
मुझे कोई अनुज्ञप्ति या अनुज्ञापत्र की जरूरत नहीं
चला जाता हूँ कहीं भी यहाँ तक कि संसद के दोनों सदनों में रिपोर्ट बनकर।
मैं अपनी वादा पर ठिके रहता हूँ किसी से संविदा या करार करने से
पारदर्शित मेरा पहला नियम है, काम छोटा हो बडा हो
जरा सोचो तो.. कौन हूँ मैं
आमंत्रित करता हॅूं निविदा सूचनाएं और निविदा प्रपत्र
मेरी जिंदगी है केंद्र सरकार का कार्यालय
14 दोस्‍तों का साथ है मुझको और द्विभाषी है सहयोगी।
मैं रहता हूँ केंद्र सरकार के कार्यालय में
जरा सोचो तो कौन हूँ मैं.......?
(उत्‍तर के लिए पृष्‍ठ सं..... देखिए)


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